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Haryana news: हरियाणा के मटौर गांव के मंदिर में शिक्षा की अनोखी पहल, पूजा के साथ पढ़ाई भी

Haryana news: हरियाणा के कैथल जिले के मटौर गांव में एक मंदिर में शिक्षा का अनोखा केंद्र बना है, आइए जानें पूरी खबर विस्तार से...
 
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Top Haryana news: आमतौर पर मंदिरों में लोग पूजा करने आते हैं लेकिन इस मंदिर में पूजा के साथ-साथ बच्चे पढ़ाई भी कर रहे हैं। यहां एक फ्री लाइब्रेरी और इंटरनेट की सुविधा भी उपलब्ध है। इस अनोखी पहल की शुरुआत मंदिर के महंत सुमेर दास ने की है। उनका उद्देश्य बच्चों को अच्छी शिक्षा देना और उन्हें आगे बढ़ने का मौका देना है।

महंत सुमेर दास की सोच

महंत सुमेर दास पिछले कई वर्षों से इस मंदिर की सेवा कर रहे हैं। यह मंदिर महाभारत काल की 48 कोस भूमि में स्थित है जिसे श्री तीर्थ कहा जाता है। यहां देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित हैं और श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।

महंत सुमेर दास ने बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए मंदिर के अंदर ही एक पढ़ाई का माहौल तैयार किया। उनका मानना है कि शिक्षा ही समाज को आगे ले जाती है इसलिए उन्होंने इस नेक काम की शुरुआत की।

मंदिर में आधुनिक लाइब्रेरी

मंदिर के अंदर बनी इस लाइब्रेरी में बच्चों के लिए सभी जरूरी सुविधाएं मौजूद हैं। यहां वाई-फाई इंटरनेट, कंप्यूटर, एसी, पंखे और सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। लाइब्रेरी में शांति का माहौल होता है जिससे बच्चे एकाग्र होकर पढ़ाई कर पाते हैं। इसके साथ ही महंत जी द्वारा बच्चों के लिए चाय और भोजन की व्यवस्था भी की गई है, जिससे उन्हें किसी प्रकार की परेशानी न हो।

सरकारी नौकरी तक पहुंच बना चुके छात्र

इस मंदिर की लाइब्रेरी में पढ़ाई करने वाले कई बच्चों को अब तक सरकारी नौकरियां मिल चुकी हैं। पिछले डेढ़ साल में यहां पढ़ने वाले करीब 15 से 20 बच्चों ने सरकारी नौकरी प्राप्त की है। यहां दिन के साथ-साथ रात में भी विद्यार्थी पढ़ते हैं खासकर जब परीक्षा पास आती है।

इस लाइब्रेरी की सबसे खास बात यह है कि यह केवल मटौर गांव तक सीमित नहीं है बल्कि आसपास के गांवों के छात्र भी यहां आकर पढ़ाई कर सकते हैं।

शिक्षा और आस्था का संगम

मटौर गांव का यह मंदिर अब सिर्फ पूजा का स्थान नहीं रहा बल्कि यह शिक्षा का भी एक प्रमुख केंद्र बन गया है। यहां धार्मिक आस्था के साथ-साथ शिक्षा का माहौल भी बना हुआ है। महंत सुमेर दास की यह पहल समाज के लिए एक प्रेरणा है। इस मंदिर की लाइब्रेरी आज उन बच्चों के लिए उम्मीद की किरण बन गई है जो संसाधनों की कमी के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।