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MBBS Admission: किसने स्थापित किया था देश का सबसे सस्ता मेडिकल कॉलेज, फीस मात्र केवल 8,240 रुपये

MBBS Admission: देश में लाखों युवा हर साल डॉक्टर बनने का सपना देखते है, जिसके लिए उनको NEET  परीक्षा पास करने के बाद देश भर के मेडिकल कॉलेजों में उन्‍हें नीट रैंकिंग के आधार पर एडमिशन मिलता है।

 
MBBS Admission: किसने स्थापित किया था देश का सबसे सस्ता मेडिकल कॉलेज, फीस मात्र केवल 8,240 रुपये
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Top Haryana: पिछले साल आई NIRF रैंकिंग में भी इसे देश का सबसे बढ़िया मेडिकल कॉलेज बताया गया है, NEET परीक्षा के अधिकतर टॉपर इसी मेडिकल कॉलेज से MBBS करते है, यहां MBBS की 1 साल की फीस करीब 1 हजार 648 रुपये है, यहां से महज 8 हजार 240 रुपये में MBBS पूरा किया जा सकता है, देश के नंबर 1 मेडिकल कॉलेज की स्‍थापना किसने की।

एम्स की स्थापना स्थापना एक राजकुमारी ने की थी, उस राजकुमारी का नाम था अमृत कौर, जो भारत की पहली स्वास्थ्य मंत्री थीं, एम्स के स्थापना की कहानी शुरू होती है वर्ष 1946 से, जब भारत सरकार के एक सर्वे में अच्छी मेडिकल शिक्षा के लिए एक संस्थान की आवश्यकता पर जोर दिया गया लेकिन उस समय संसाधन और पैसों का अभाव था।

फंड इकट्ठा हुआ 10 साल में 

वर्ष 1946 में भारत सरकार की तरफ से कराए गए एक सर्वे में पोस्‍ट ग्रेजुएट मेडिकल इंस्‍टीट्यूट की सिफारिश तो की गई थी लेकिन इसके निर्माण में लगने वाली रकम ने सबकी चिंताएं बढ़ा दी थी, राजकुमारी अमृत कौर ने 10 साल तक इसके लिए प्रयास किया और उन्‍हें एम्‍स के लिए जरूरी फंड को इकट्ठा करने में 10 साल का समय लग गया।

AIIMS की नींव

तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री राजकुमारी अमृत कौर ने 18 फरवरी 1956 को लोकसभा में एक नया बिल पेश किया, उन्होंने कहा कि देश में पोस्‍ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई और मेडिकल एजुकेशन के उच्‍च स्‍तर को बरकरार रखने के लिए, एक ऊंच स्तर के इंस्‍टीट्यूट की जरूरत है, जो युवाओं को उनके ही देश में पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद की पढ़ाई के लिए प्रेरित कर सके।

राजकुमारी अमृत कौर ने उस समय कहा कि मैं यह कहना चाहूंगी कि ये एक ऐसी घटना होगी जिस पर भारत को हमेशा गर्व रहेगा और मैं चाहती हूं कि भारत इस पर गर्व करे और इस तरह मई 1956 में संसद के दोनों सदनों ने ऑल इंडिया इंस्‍टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एक्‍ट ने पास कर दिया, जिसके बाद एम्स की नींव रखी गई।

राजा हरनाम की बेटी 

राजकुमारी अमृत कौर का जन्‍म 2 फरवरी 1887 को लखनऊ में हुआ था, वह राजा हरनाम सिंह अहलूवालिया की बेटी थी, राजा हरनाम ने राजगद्दी को लेकर हुए विवाद के कारण कपूरथला छोड़ दिया और लखनऊ आ गए। वह तब के अवध स्टेट में मैनेजर बन गए राजा हरनाम ने क्रिश्चियन धर्म अपना लिया था। 

ऑक्‍सफोर्ड से किया ग्रेजुएशन

राजकुमारी अमृत कौर ने एक अच्‍छे स्‍कूल कॉलेज से पढ़ाई की थी, उनकी स्‍कूलिंग इंग्लैंड के शीरबॉर्न स्‍कूल फॉर गर्ल्स से हुई थी,  उन्होंने ऑक्‍सफोर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की, इंग्‍लैंड से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वह वर्ष 1908 में भारत वापस लौट आई थी। उन्होंने आजादी की लड़ाई में योगदान दिया, 6 फरवरी 1964 को राजकुमारी अमृत कौर का निधन हो गया था।