Wheat Storage Limit: गेहूं की कालाबाजारी करने वालों की दुकानें होगी बंद, सरकार ने दिया ये आदेश

Top Haryana: सरकार ने थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं और गेहूं प्रसंस्करण करने वालों के लिए भंडारण की सीमा घटा दी है। इसका उद्देश्य देश में गेहूं की कीमतों को काबू में रखना है। सरकार ने कहा कि देश में खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार है, लेकिन फिर भी कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए नए नियम लागू किए गए हैं। गेहूं की नई फसल की कटाई मार्च के अंत में शुरू होती है, और सरकार ने 31 मार्च तक इन नई सीमाओं को लागू करने का निर्णय लिया है।
क्या है नई लिमिट
अब तक जो नियम थे, उनके अनुसार व्यापारी और थोक विक्रेता 1 हजार टन तक गेहूं का भंडारण कर सकते थे, लेकिन अब यह सीमा घटाकर 250 टन कर दी गई है। इसका मतलब है कि व्यापारी अब पहले से कम गेहूं रख सकेंगे। खुदरा विक्रेताओं के लिए भंडारण की सीमा 5 टन से घटाकर 4 टन कर दी गई है।
सरकार ने यह भी कहा कि गेहूं का प्रसंस्करण करने वालों को अपने मासिक भंडारण की क्षमता का केवल 50 प्रतिशत तक ही गेहूं रखने की अनुमति होगी, जो अप्रैल 2025 तक लागू रहेगा। सभी गेहूं भंडारण करने वाली इकाइयों को गेहूं भंडार सीमा पोर्टल पर पंजीकरण कराना जरूरी होगा और हर शुक्रवार को भंडारण की स्थिति की जानकारी देनी होगी।
सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया है ताकि गेहूं की कीमतों को नियंत्रित किया जा सके और देश में इसकी उपलब्धता सुनिश्चित रहे। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने यह भी कहा कि वह देश में गेहूं के भंडारण की स्थिति पर कड़ी निगरानी रखेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि भंडारण सीमा के भीतर ही गेहूं रखा जाए।
यह कदम खासतौर पर उन व्यापारी और विक्रेताओं के लिए है जो गेहूं का ज्यादा भंडारण करके कालाबाजारी करते हैं और बाजार में कीमतों को बढ़ाते हैं। सरकार का उद्देश्य इन गतिविधियों को रोकना और आम जनता को सस्ती दरों पर गेहूं उपलब्ध कराना है।
हर साल जब खास मौके जैसे त्योहारों के दौरान खाद्यान्न की मांग बढ़ती है, तो कीमतों में अचानक वृद्धि होती है। सरकार इस प्रकार की स्थिति से निपटने के लिए हर साल गेहूं और अन्य खाद्यान्नों के भंडारण पर नियमों की समीक्षा करती है।
नए भंडारण नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यापारी या विक्रेता अफरा-तफरी पैदा करके गेहूं की कीमतों में मनमाना इजाफा न कर सके। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि देश में खाद्यान्न का कोई संकट नहीं है, और यह कदम सिर्फ कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए उठाया गया है।