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हरियाणा में इन प्राइवेट स्कूलों की होगी मान्यता रद्द , सरकार ने दिया आदेश

Haryana News: हरियाणा में प्राइवेट स्कूलों पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है, दरअसल सरकार इन प्राइवेट स्कूलों पर दाखिला ना देने पर कार्रवाई करी जाएगी। 
 
हरियाणा में इन प्राइवेट स्कूलों की होगी मान्यता रद्द
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Top Haryana, New Delhi: हरियाणा सरकार ने राज्य के प्राइवेट स्कूलों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। दरअसल कई मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों की शिकायतें सामने आई हैं कि वे गरीब बच्चों को दाखिला नहीं दे रहे हैं। ये दाखिले “शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009” (RTE एक्ट) के तहत होने चाहिए थे। इस पर शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने नाराजगी जताई है और स्कूलों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

21 अप्रैल तक है दाखिले की आखिरी तारीख

जानकारी के अनुसार, हरियाणा में लगभग 30 प्रतिशत प्राइवेट स्कूल ऐसे हैं जिन्होंने अभी तक गरीब बच्चों को दाखिला देने की प्रक्रिया शुरू ही नहीं की है। जबकि RTE एक्ट के तहत पहली कक्षा और पूर्व-प्राथमिक कक्षाओं (नर्सरी, केजी आदि) में 25% सीटें गरीब बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं। इन सीटों पर दाखिले की प्रक्रिया 15 अप्रैल से शुरू हो चुकी है और 21 अप्रैल तक चलेगी।

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शिक्षा मंत्री ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ एक बैठक कर ऐसे स्कूलों की सूची तैयार करने को कहा है, जो नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि इन स्कूलों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।

RTE के तहत जरूरी है दाखिला

RTE एक्ट के तहत यह नियम है कि सभी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को अपनी पहली कक्षा में 25 प्रतिशत सीटें गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित करनी होती हैं। ये दाखिले निशुल्क होते हैं और बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च सरकार उठाती है।

शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि जिन स्कूलों ने अब तक इस नियम का पालन नहीं किया है, उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। इनमें स्कूल की मान्यता रद्द करने तक की कार्रवाई हो सकती है।

सरकार की सख्ती का मकसद

राज्य सरकार का मकसद है कि हर बच्चे को बिना किसी भेदभाव के अच्छी शिक्षा मिले। खासकर वे बच्चे जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं, उन्हें भी प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाई का अवसर मिलना चाहिए। सरकार का मानना है कि अगर सभी स्कूल RTE के तहत दाखिला देंगे, तो समाज में शिक्षा की बराबरी आएगी।

शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने साफ कहा है कि जो भी स्कूल गरीब बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन करेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह सिर्फ कानून का पालन ही नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है।

माता-पिता से अपील

शिक्षा विभाग ने गरीब परिवारों से अपील की है कि वे अपने बच्चों के दाखिले के लिए आवेदन जरूर करें। 21 अप्रैल तक दाखिले की प्रक्रिया जारी है, इसलिए योग्य माता-पिता को इसका फायदा उठाना चाहिए। इस कदम से उम्मीद की जा रही है कि शिक्षा के क्षेत्र में समानता बढ़ेगी और गरीब बच्चों को भी बेहतर भविष्य मिल सकेगा।

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