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Rajasthan NTT: राज्य में NTT कोर्स दुबारा इस नाम से होगा शुरू, जानें कहां-कितनी होंगी सीटें

Rajasthan NTT: राजस्थान में 15 साल बाद नर्सरी टीचर ट्रेनिंग (NTT) कोर्स दुबारा से शुरू किया जा रहा है। अब की बार इस कोर्स का नाम बदल गया है, आइए जानें पूरे विस्तार के साथ...
 
राज्य में NTT कोर्स दुबारा इस नाम से होगा शुरू, जानें कहां-कितनी होंगी सीटें
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TOP HARYANA: राजस्थान में 15 साल बाद नर्सरी टीचर ट्रेनिंग (NTT) कोर्स फिर से शुरू किया जा रहा है। इस कोर्स का नाम अब बदलकर “डिप्लोमा इन प्री स्कूल एजुकेशन” रखा गया है। राजस्थान सरकार ने राज्य के सभी 34 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डाइट) में इस कोर्स को शुरू करने की तैयारी की है। पहले इस कोर्स का उद्देश्य प्री-प्राइमरी (नर्सरी) शिक्षकों की भर्ती करना था और अब फिर से इस कोर्स को शुरू किया जा रहा है।

इस कोर्स की सीटों की संख्या हर डाइट में 50 होगी। हालांकि इस कोर्स में दाखिले की प्रक्रिया और योग्यता को लेकर अभी सरकार की ओर से पूरी जानकारी जारी नहीं की गई है।

गौरतलब है कि 2010 में राजस्थान में थर्ड ग्रेड शिक्षक भर्ती के दौरान एनटीटी को अवैध करार दिया गया था। इसके बाद राज्य सरकार ने सभी संस्थानों की मान्यता वापस ले ली थी, जहां यह कोर्स करवाया जाता था। तब से पहले थर्ड ग्रेड शिक्षक भर्ती में एनटीटी कोर्स अनिवार्य था। लेकिन अब राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि इस कोर्स को फिर से शुरू किया जाए।

कितने स्कूलों में दी अनुमति 

इस कोर्स को फिर से शुरू करने के पीछे मुख्य कारण राज्य में प्री-प्राइमरी शिक्षकों की कमी है। राजस्थान में अंग्रेजी माध्यम से चलने वाले महात्मा गांधी राजकीय स्कूल और पीए श्री स्कूलों में प्री-प्राइमरी शिक्षक नहीं हैं। राज्य में कुल 402 पीए श्री स्कूल हैं, जिनमें पिछले साल नवंबर में प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू करने की अनुमति दी गई थी। इन स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने इस कोर्स को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया है।

सरकार के अनुसार 

राज्य सरकार के अनुसार, सभी डाइट में इस कोर्स को शुरू करने के लिए संसाधनों की व्यवस्था की जा रही है। जिन डाइट के पास पर्याप्त संसाधन होंगे, उन्हें पहले अनुमति दी जाएगी। इस कदम से राज्य में प्री-प्राइमरी शिक्षा के लिए योग्य शिक्षकों की संख्या में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।

इस कोर्स की शुरुआत से न केवल स्कूलों में प्री-प्राइमरी शिक्षकों की कमी पूरी होगी, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। राज्य सरकार की यह पहल राज्य में शिक्षा क्षेत्र को मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।