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Haryana news: UHS वेतन घोटाला, क्या कर्मचारियों के नाम पर हो रही थी फर्जी कमाई? जांच में चौंकाने वाले खुलासे

Haryana news:UHS में वेतन भुगतान को लेकर भारी अनियमितता की बात सामने आई है। आइए जानें पूरी खबर विस्तार से...
 
UHS वेतन घोटाला, क्या कर्मचारियों के नाम पर हो रही थी फर्जी कमाई? जांच में चौंकाने वाले खुलासे
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Top Haryana: हरियाणा के स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (UHS) में कर्मचारियों के वेतन घोटाले का मामला लगातार सुर्खियों में है। अब इस मामले में एक नया मोड़ सामने आया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्वीकार किया है कि यदि ठेके पर रखे गए कर्मचारियों को हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN) पोर्टल में शामिल कर लिया जाए, तो विश्वविद्यालय को हर महीने करीब 3.45 लाख रुपये की बचत हो सकती है। यह बचत साल भर में 41.41 लाख रुपये तक पहुंच सकती है।

HKRN पोर्टल खोलने की अपील

इस संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन ने मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च डिपार्टमेंट (DMER) के निदेशक को एक पत्र लिखा है। पत्र में HKRN पोर्टल को दोबारा खोलने की मांग की गई है ताकि ठेके पर काम कर रहे कर्मचारियों को HKRN में शामिल किया जा सके। विश्वविद्यालय ने जानकारी दी है कि इस समय 1 हजार 271 कर्मचारी ठेके के तहत काम कर रहे हैं, जिनका मासिक वेतन खर्च 3 करोड़ 19 लाख 58 हजार 211 रुपये है।

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कर्मचारियों के वर्ग और वेतन विवरण

वर्तमान में जिन कर्मचारियों को ठेके पर रखा गया है, उनमें 962 बैरर (सफाई कर्मचारी आदि) शामिल हैं, जिन पर हर महीने 2 करोड़ 32 लाख 92 हजार 717 रुपये खर्च होते हैं। 55 डाटा एंट्री ऑपरेटर हैं, जिनका वेतन 16 लाख 12 हजार 872 रुपये है। 254 अन्य तरह के कर्मचारी (मिस लीनियर) हैं, जिन पर 70 लाख 52 हजार 622 रुपये खर्च हो रहे हैं।यदि इन्हीं कर्मचारियों को HKRN पोर्टल में स्थानांतरित कर दिया जाए तो यह खर्च घटकर हर महीने 3 करोड़ 16 लाख 13 हजार 83 रुपये रह जाएगा। यानी विश्वविद्यालय को हर महीने लगभग 3.45 लाख रुपये और साल में करीब 41 लाख रुपये की बचत होगी।

अतिरिक्त बजट की जरूरत नहीं

विश्वविद्यालय ने यह भी साफ किया है कि HKRN के माध्यम से कर्मचारियों की भर्ती की जाए तो इसके लिए किसी भी तरह का अतिरिक्त बजट नहीं चाहिए होगा। विश्वविद्यालय की अकाउंट ब्रांच ने यह पूरा खर्चा और आंकड़े जांचे हैं और सभी जानकारी संबंधित अधिकारियों को भेज दी गई है।

घोटाले की जांच में जुटे सीवीओ

इस पूरे मामले की जांच अब विश्वविद्यालय के चीफ विजिलेंस ऑफिसर (CVO) डॉ. कुंदन मित्तल कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों ने वेतन घोटाले की शिकायत दी थी और कुछ जरूरी दस्तावेज भी सौंपे हैं, जिनकी जांच की जा रही है। डॉ. मित्तल ने कहा कि अभी जांच चल रही है, इसलिए ठेकेदार और अन्य संबंधित पक्षों से भी बातचीत की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

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