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Haryana news: हरियाणा में पेड़ों और बगीचों को भी मिलेगी वन की मान्यता, सरकार ने बदले नियम

Haryana news: हरियाणा से बड़ी खबर सामने आ रही है, दरअसल सरकार ने पेड़ों और बगीचों को लेकर नियमों में बदलाव किए है, आइए जानें इसके बारें में विस्तार से...

 
पेड़ों और बगीचों
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Top Haryana: हरियाणा सरकार ने पेड़ों, कृषि वन और बगीचों को लेकर बड़े स्तर पर नियमों में बदलाव किया है। अब कुछ खास शर्तों को पूरा करने वाली जमीनों को भी वन की श्रेणी में रखा जाएगा जिससे उन्हें भी कानूनी संरक्षण मिल सकेगा। यह बदलाव सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद किए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद किया गया बदलाव

1996 में सुप्रीम कोर्ट ने गोदावर्मन केस में कहा था कि वन शब्द की कोई तय परिभाषा नहीं है। कोर्ट ने सभी राज्यों को आदेश दिया था कि वे अपने क्षेत्र में सभी प्रकार की वन भूमि की पहचान करें चाहे वो सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हो या सिर्फ डिक्सनरी के मतलब में आती हो। यह इसलिए किया गया ताकि वन (संरक्षण) अधिनियम 1980 को पूरे देश में एक समान तरीके से लागू किया जा सके।

नई परिभाषा में क्या है शर्तें?

हरियाणा सरकार ने अब यह तय किया है कि कौन-सी जमीनें वन मानी जाएंगी। इसके लिए कुछ नियम बनाए गए हैं।

अगर कोई जमीन का टुकड़ा कम से कम 5 हैक्टेयर में फैला है और चारों ओर से अलग-थलग है तो वह वन की श्रेणी में आएगा। यदि वह जमीन पहले से मौजूद किसी सरकारी नोटिफाईड फॉरेस्ट से जुड़ी हुई है तो उसका आकार कम से कम 2 एकड़ होना चाहिए।

साथ ही उस जमीन का कैनोपी घनत्व (canopy density) 0.4 या उससे ज्यादा होना जरूरी है। हालांकि सरकार ने यह भी साफ किया है कि नोटिफाईड वन क्षेत्र के बाहर जो एग्रो फॉरेस्ट, कॉम्पैक्ट बाग-बगीचे या लाइन से लगाए गए पेड़ हैं उन्हें इस परिभाषा में शामिल नहीं किया जाएगा।

जमीन की पहचान और कमेटियों का गठन
जिला स्तरीय कमेटी
इसकी अध्यक्षता जिले के उपायुक्त करेंगे और यह जमीनों की पहचान कर प्रस्ताव बनाएगी।

राज्य स्तरीय कमेटी
इसकी अध्यक्षता अतिरिक्त मुख्य सचिव करेंगे और यह प्रस्तावों की समीक्षा कर अंतिम सिफारिश करेगी। इसके बाद हरियाणा सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया जाएगा।

हरियाणा में वर्तमान वन क्षेत्र

फिलहाल हरियाणा में कुल 3 हजार 307.28 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र वन के अंतर्गत आता है। इसमें से 1 हजार 614.26 वर्ग किलोमीटर वनावरण और 1 हजार 693.02 वर्ग किलोमीटर वृक्षावरण है जो राज्य के कुल क्षेत्र का 7.48% है। जबकि राष्ट्रीय नीति के अनुसार किसी भी राज्य में कम से कम 20% क्षेत्र वन होना चाहिए।

क्या होगा फायदा?

पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आनंद मोहन शरण ने बताया कि पहले वन की कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं थी जिससे कई जमीनें संरक्षण के बाहर रह जाती थीं। अब इस परिभाषा से यह स्पष्ट हो गया है कि किसे वन माना जाएगा और जो भी जमीन इस दायरे में आएगी उसे कानूनी संरक्षण और सुरक्षा मिलेगी।