Haryana news: हरियाणा पुलिस कांस्टेबल भर्ती विवाद पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, साफ गलतियों को नहीं किया जा सकता
Top Haryana: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा पुलिस कांस्टेबल भर्ती 2018 से जुड़ी एक अहम याचिका पर सुनवाई करते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि अगर किसी भर्ती परीक्षा की आंसर की (उत्तर कुंजी) में साफ और स्पष्ट गलतियां हैं तो इसके कारण योग्य उम्मीदवारों को चयन से वंचित नहीं किया जा सकता।
कोर्ट का मानना है कि तकनीकी खामियां या मूल्यांकन की गलतियों की वजह से उम्मीदवारों की मेहनत और मेरिट को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। यह न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
क्या था मामला?
यह याचिका मंगल सिंह और अन्य उम्मीदवारों द्वारा हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) के खिलाफ दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने साल 2018 में कांस्टेबल पद के लिए आवेदन किया था।
चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा, फिजिकल स्क्रीनिंग टेस्ट (PST), फिजिकल मेजरमेंट टेस्ट (PMT) और दस्तावेज़ सत्यापन शामिल था। याचिकाकर्ताओं ने PST और PMT को सफलतापूर्वक पास कर लिया था लेकिन जब 28 फरवरी 2019 को फाइनल मेरिट लिस्ट जारी हुई तो उनका नाम उसमें नहीं था।
उत्तर कुंजी पर आपत्ति
याचिकाकर्ताओं की मुख्य आपत्ति 18 जनवरी 2019 को जारी हुई आंसर की से थी। उन्होंने दो प्रश्नों (प्रश्न संख्या 28 और 94) को लेकर आपत्ति जताई थी। खासतौर पर प्रश्न संख्या 94 जो अंग्रेजी व्याकरण से जुड़ा था उस पर विवाद था।
उनका आरोप था कि अलग-अलग प्रश्नपत्र सेटों में एक ही प्रश्न के लिए अलग-अलग उत्तर बताए गए जिससे उम्मीदवारों में भ्रम फैला और गलत मूल्यांकन हुआ।
कोर्ट का रुख और विशेषज्ञ की राय
कोर्ट ने इस पर कहा कि सिर्फ दो सेटों में आए फर्क से पूरी प्रक्रिया को गलत नहीं ठहराया जा सकता। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि अंग्रेजी व्याकरण जैसे मामलों में कोर्ट खुद विशेषज्ञ की भूमिका नहीं निभा सकता।
HSSC की ओर से बताया गया कि सभी आपत्तियों को विशेषज्ञ समिति के पास भेजा गया था और आयोग ने उनकी राय के अनुसार ही निर्णय लिया। आयोग ने यह भी कहा कि वह स्वयं विशेषज्ञ संस्था नहीं है इसलिए विशेषज्ञों की राय पर ही भरोसा किया गया।
कोर्ट की टिप्पणी और भर्ती संस्थाओं की जिम्मेदारी
राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा गया कि सामान्य हालातों में अदालतों को उत्तर कुंजी में दखल नहीं देना चाहिए। लेकिन इस पर जस्टिस जगमोहन बंसल ने कहा कि जब गलती सामने, स्पष्ट और बिना विवाद के हो तो कोर्ट चुप नहीं रह सकता।
उन्होंने कहा कि भर्ती कराने वाली संस्थाओं की जिम्मेदारी बनती है कि आंसर की हर सेट में एक जैसी और सटीक होनी चाहिए ताकि उम्मीदवारों का भरोसा बना रहे। कोर्ट ने साफ किया कि भविष्य में ऐसी गलतियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
