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Haryana news: हरियाणा सरकार का बड़ा कदम, कच्चे कर्मचारियों के लिए बनेगा पोर्टल, मिलेगी नौकरी की सुरक्षा

Haryana news: हरियाणा के कच्चे कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर सामने आ रही है, आइए जानें पूरी खबर विस्तार से...
 
कच्चे कर्मचारी
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Top Haryana News: हरियाणा सरकार ने अस्थायी (कच्चे) कर्मचारियों को राहत देने के लिए एक अहम फैसला लिया है। अब ऐसे कर्मचारियों के नौकरी से जुड़े मामलों को उठाने और समाधान पाने के लिए एक नया ऑनलाइन पोर्टल बनाया जा रहा है।

इस पोर्टल के ज़रिए कर्मचारी नियमों के तहत अपनी समस्याएं दर्ज करा सकेंगे और उन पर उचित कार्रवाई की जाएगी। यह पोर्टल सरकार द्वारा जल्द ही लॉन्च किया जाएगा। इससे हजारों कच्चे कर्मचारियों को सीधा फायदा होगा।

मानसून सत्र में उठे सवाल

हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान पंचकूला से विधायक चंद्र मोहन ने अस्थायी कर्मचारियों से जुड़ा सवाल उठाया। उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से पूछा कि क्या सरकार इन कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा को लेकर कोई कदम उठा रही है।

इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने एक पोर्टल का मॉड्यूल तैयार कर लिया है जहां कच्चे कर्मचारी अपनी समस्याएं ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे।

किन कर्मचारियों को मिलेगा इस पोर्टल से लाभ?

मुख्यमंत्री ने बताया कि यह पोर्टल हरियाणा संविदात्मक कर्मचारी (सेवा की सुनिश्चितता) अधिनियम के तहत काम करेगा। इस अधिनियम का लाभ सिर्फ उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा जिन्होंने कम से कम 5 साल तक संविदा सेवा की हो। यानी जिन कर्मचारियों की सेवा 5 साल से कम है उन्हें इस अधिनियम के तहत फिलहाल शामिल नहीं किया गया है।

ईपीएफ और अन्य विभागों में की गई सेवा का क्या होगा?

विधायक चंद्र मोहन ने यह भी पूछा कि क्या किसी संविदा कर्मचारी ने पहले किसी सरकारी विभाग, बोर्ड, निगम या प्राधिकरण में काम किया हो और EPF (कर्मचारी भविष्य निधि) में योगदान दिया हो तो क्या उस सेवा को जोड़ा जाएगा?

इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने साफ किया कि यदि किसी कर्मचारी ने सरकार के किसी विभाग, बोर्ड, निगम या प्राधिकरण में कच्ची सेवा की है तो उसकी सेवा अवधि को जोड़ा जाएगा जिससे 5 साल की सेवा पूरी मानी जा सकती है।

राज्य विश्वविद्यालयों में की गई नौकरी को मान्यता नहीं

हालांकि, मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि यदि कोई कर्मचारी किसी राज्य विश्वविद्यालय (जैसे कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय) में संविदा पर काम कर चुका है तो उस सेवा को इस अधिनियम के तहत मान्यता नहीं दी जाएगी। क्योंकि राज्य विश्वविद्यालय ‘सरकारी संस्था’ की परिभाषा में नहीं आते। इसलिए वहां की गई संविदा सेवा का लाभ इस योजना के तहत नहीं मिलेगा।