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First satellite-based toll: देश के इस राज्य में बनेगा पहला सेटेलाइट टोल, जानें किस तरीके से करेगा काम 

First satellite-based toll: देश में पहला सेटेलाइट टोल लगने की तैयारी में है, अब टोल भी सेटेलाइट से कटेगा, आइए जानें इसका सिस्टम किस तरह से काम करेगा...
 
देश के इस राज्य में बनेगा पहला सेटेलाइट टोल जानें किस तरीके से करेगा काम
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TOP HARYANA: हरियाणा के गुरुग्राम जिले में देश का पहला सेटेलाइट टोल प्लाजा बनने जा रहा है, जो प्रदेश के युवाओं के लिए एक अच्छी खबर है। यह जानकारी पूर्व कैबिनेट मंत्री राव नरवीर सिंह ने दी। वह बादशाहपुर विधानसभा क्षेत्र के सेक्टर 83 स्थित सोसाइटी एमआर पाम गार्डन में एक कार्यक्रम में पहुंचे थे। 
इस कार्यक्रम के दौरान राव नरवीर सिंह ने बताया कि दिल्ली-जयपुर हाईवे के खेड़की दौला टोल को शिफ्ट करने का कार्यक्रम चल रहा है, लेकिन इस बारे में अभी समय नहीं बताया जा सकता। खेड़की दौला टोल को पचगांव में शिफ्ट किया जाएगा, लेकिन इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा यहां सेटेलाइट टोल प्लाजा बनाने की योजना पर विचार भी किया जा रहा है।

सेटेलाइट टोल प्लाजा एक नई तकनीक पर आधारित होगा, जो वाहन चालकों को टोल गेट पर रुकने की आवश्यकता नहीं होने देगा। इसमें वाहन चालक को बिना रुके अपनी यात्रा जारी रखने का अवसर मिलेगा, और टोल टैक्स उनके खाते से स्वत: कट जाएगा। इस सिस्टम में खास बात यह है कि टोल टैक्स केवल उस दूरी के हिसाब से लिया जाएगा, जो वाहन ने तय की है। यानी, जितनी दूर यात्रा की जाएगी, उतने ही किलोमीटर का टोल टैक्स काटा जाएगा।

यह टोल कलेक्शन सिस्टम GPS यानी ग्लोबल नेवीगेशन सेटेलाइट सिस्टम पर आधारित होगा। इसका मतलब है कि इस सिस्टम के जरिए वाहन की सटीक लोकेशन को ट्रैक किया जाएगा। जैसे ही वाहन एक टोल क्षेत्र में प्रवेश करेगा, सेटेलाइट के जरिए उसकी यात्रा की दूरी को मापा जाएगा और उसी के आधार पर टोल टैक्स काट लिया जाएगा। यह प्रक्रिया पूरी तरह से ऑटोमेटेड होगी, जिससे चालक को किसी भी टोल बूथ पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे समय की बचत होगी और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याओं से भी निजात मिलेगी।

यह सेटेलाइट टोल सिस्टम न केवल यात्रा को सरल बनाएगा, बल्कि इससे टोल कलेक्शन में पारदर्शिता भी बढ़ेगी। इस नई प्रणाली से भ्रष्टाचार को भी रोका जा सकेगा, क्योंकि टोल टैक्स की पूरी प्रक्रिया इलेक्ट्रॉनिक रूप से संचालित होगी। इसके अलावा, यह सिस्टम पर्यावरण के लिहाज से भी फायदेमंद होगा, क्योंकि इससे वाहन चालकों को टोल बूथ पर रुकने की जरूरत नहीं होगी, जिससे इंधन की बचत होगी और प्रदूषण में कमी आएगी।

इससे यातायात व्यवस्था और सड़क सुरक्षा में भी सुधार होगा, क्योंकि यह टोल कलेक्शन प्रक्रिया को तेज और सुविधाजनक बनाएगा। इस प्रणाली की सफलता से देशभर में अन्य राज्यों में भी ऐसे सेटेलाइट टोल प्लाजा बनाने की संभावना बढ़ सकती है।