Tenant rights 2025: किरायेदारों को लेकर बड़ी अपडेट, मिले ये 6 अधिकार, जानें

Tenant rights update: किराएदार और मकान मालिक के बीच अक्सर विवाद होते रहते हैं, लेकिन दोनों को कानूनी अधिकार मिलते हैं। किराएदार के अधिकारों की जानकारी होना बेहद जरूरी है ताकि वे अपनी स्थिति का सही तरीके से पालन कर सकें और किसी भी गलत व्यवहार या शोषण से बच सकें...

 

Top Haryana: हम आज इस खबर के माध्यम से किराएदारों के अधिकारों के बारे में बहुत महत्वपूर्ण जानकारी बताने जा रहे है। यह अधिकार हर किराएदार को जानने चाहिए ताकि वह किसी भी विवाद या शोषण से बच सके। कुछ प्रमुख अधिकारों को और भी विस्तार से समझ सकते हैं...

रेंट एग्रीमेंट का महत्व:
बिना रेंट एग्रीमेंट के किराए पर रहना जोखिम भरा हो सकता है। रेंट एग्रीमेंट में तय की गई शर्तों के मुताबिक, मकान मालिक आपको बिना किसी उचित कारण के घर खाली नहीं करवा सकता है। केवल किराया न देने या प्रॉपर्टी का गलत उपयोग करने पर ही वह आपको 15 दिन का नोटिस देकर मकान खाली करवा सकता है।

किराए में वृद्धि:

किराया अचानक और मनमर्जी से नहीं बढ़ाया जा सकता। मकान मालिक को किराए में वृद्धि से कम से कम 3 महीने पहले नोटिस देना पड़ता है। इस प्रकार, किराएदार को अचानक होने वाले वित्तीय बोझ से बचाया जा सकता है।

मरम्मत की जिम्मेदारी:

यदि घर में कोई खराबी आती है, तो उसकी मरम्मत मकान मालिक की जिम्मेदारी है। किराएदार को यह सुनिश्चित करने का अधिकार है कि मकान में सभी सुविधाएं सही स्थिति में काम कर रही हों। अगर मकान मालिक मरम्मत नहीं कराता, तो किराएदार रेंट अथॉरिटी से मदद ले सकता है।

किराएदार का परिवार:

यदि किराएदार का निधन हो जाता है, तो मकान मालिक किराएदार के परिवार को घर खाली करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। इस स्थिति में, किराएदार का परिवार उस संपत्ति में रहने के अधिकार को जारी रख सकता है और नया रेंट एग्रीमेंट भी कर सकता है।

निजता का अधिकार:

किराएदार को अपने घर में प्राइवेसी का अधिकार है। मकान मालिक को बिना किसी उचित कारण के घर में प्रवेश करने का अधिकार नहीं है। यदि उसे मरम्मत या निरीक्षण के लिए आना है, तो वह कम से कम 24 घंटे पहले नोटिस दे। इसके अलावा, वह किराएदार के सामान को बिना अनुमति के नहीं हटा सकता है।

रसीद का अधिकार:

हर महीने किराया भुगतान करने पर किराएदार को रसीद मिलनी चाहिए। यह रसीद न केवल आयकर के लिए महत्वपूर्ण होती है, बल्कि यदि किसी विवाद की स्थिति उत्पन्न हो, तो यह कानूनी सबूत के रूप में काम आ सकती है।