Haryana news: निकाय चुनाव हरियाणा, सीएम बनने के बाद सैनी का पहला सियासी इंतहान

Haryana news: हरियाणा में निकाय चुनावों की घोषणा हो गई है, सभी पार्टियों ने इसके लिए पूरा जोर लगा दिया है।

 

TOP HARYANA: 3 महीने पहले मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सुबे में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हवा होने के बाद भी अपने दम पर सरकार बनाकर सबको हैरान कर दिया। अब अगले महीने शहरी स्थानीय निकाय चुनाव होने हैं। इन शहरी निकाय चुनावों में एक और इंतहान अब सीएम के सामने आ गया है जो उनकी 100 दिनों की कार गुजारी पर एक तरफ से प्रदेश का जनादेश होगा।

कांग्रेस भी घोषणा होने के बाद अब इन चुनावों की तैयारी में जुट गई है लेकिन उसके कार्यकर्ता अभी पिछले चुनावी हार से उभर भी नहीं पाए हैं। अब कांग्रेस के पास में निकाय चुनाव के जरिए एक और मौका आया है जब वह कुछ बेहतर करके कार्यकर्ताओं को नई उम्मीद और हौसला दे सकती है।

ऐसा माना जा रहा है कि दिल्ली चुनाव में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में काफी कड़वाहट आ जाने से आम आदमी पार्टी निकाय चुनाव में भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस से भी दो हाथ करने को तैयार है। इंडियन नेशनल लोकदल और जननायक जनता पार्टी के भी इस चुनाव मैदान में आने की पूरी उम्मीद है।

ऐसा भी कहा जा रहा है की इन चुनावों में एक बार फिर भाजपा व कांग्रेस के बीच में कड़ा मुकाबला हो सकता है। अभी तक यह साफ नहीं हुआ है कि विधानसभा चुनावों की तरह इन चुनावों में भी हुड्डा और शैलजा के बीच में रसाकशी जारी रहेगी या फिर हाई कमान उनके बीच का कोई रास्ता निकाल कर पार्टी को एकजुट करने की कोशिश करेगा। इन निकाय चुनावों में राजनितिक दलों का सबसे ज्यादा फोकस गुरुग्राम, फरीदाबाद, मानेसर, हिसार, करनाल और रोहतक के नगर निगमन पर रहेगा।

अंबाला और सोनीपत के मेयर के विधायक चुने जाने के बाद वे सीट खाली हो गई है अब वहां पर उपचुनाव होने हैं। मेयर का रुतबा व सियासी कद किसी विधायक से काम नहीं होता है। खास तौर पर तब जब वह सत्ता दल से संबंध रखता हो। इससे पहले भी ज्यादातर नगर निगम पर भाजपा का कब्जा था। अब यह भी देखा जाना है कि विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा का शहरी जनाधार किस तरफ करवट बदलता है। विधानसभा चुनाव के तुरंत बाद प्रदेश भाजपा में निकाय चुनाव की तैयारी शुरू कर दी थी।

भाजपा इस बार निकाय चुनाव को ट्रिपल इंजन के नारे व पिछले 100 दिनों में किए गए कार्यों की वजह से चुनाव में उतरेगी। अभी प्रदेश सरकार के कार्यकाल करीब पौने पांच साल बाकी है जिसका फायदा उसे इस चुनाव में मिलेगा। दिल्ली के चुनावी नतीजे की हवा भी कुछ हद तक इन चुनावों पर असर डाल सकती है। चुनाव प्रचार शुरू होने के बाद चुनाव और ज्यादा बढ़ेगा।

इन चुनावों के लिए भाजपा कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों को स्टार प्रचारकों पर अभी फैसला लेना है। यह चुनाव स्थानीय मुद्दों पर होने की वजह से चुनाव प्रचार में स्थानीय नेताओं को ही प्राथमिकता दी जाएगी। भाजपा के प्रभाव वाले क्षेत्रों में अब ऐसा माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के बाद ऊर्जा व परिवहन मंत्री अनिल विज सुपर स्टार प्रचारक की भूमिका निभा सकते हैं।

तकरीबन 3 महीने पहले हुए सुबे के विधानसभा चुनाव में व दिल्ली चुनाव में वह केवल अपने हलके अंबाला छावनी तक ही सीमित रहे थे। अब यह देखना है कि पार्टी अनिल विज के बड़े कद का निकाय चुनाव में किस तरह फायदा उठाती है।

केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर का प्रदेश के पंजाबी मतदाताओं पर अच्छा खासा प्रभाव है। तो ऐसे में वह भी स्टार प्रचारक की भूमिका निभा सकते हैं। प्रदेश के ओबीसी वोटरों को साथ लाने में नायब सिंह सैनी काफी है जबकि जाट वोटरों के लिए किरण चौधरी, ओमप्रकाश धनखड़ व कैप्टन अभिमन्यु सक्रिय नजर आ सकते हैं।