Electric Cars: इलेक्ट्रिक गाड़ियों ने किया बड़ा कमाल, पेट्रोल और डीजल की खपत हुई कम
Electric Cars: इलेक्ट्रिक गाड़ियों को भारत में बहुत पसंद किया जा रहा है, इससे देश को बड़ा लाभ हो सकता है, पेट्रोल और डीजल की मांग में कमी आई है।
Top Haryana, New Delhi: इलेक्ट्रिक वाहनों को खरीदने पर सब्सिडी देने से लेकर आयकर टैक्स में छूट देने के पीछे सरकार का जो मकसद था, अब उसका प्रभाव सच में दिखाई देने लगा है, इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती बिक्री का असर भारत में पेट्रोल और डीजल की मांग पर दिखना शुरू हो चुका है।
SBI सिक्योरिटी की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में पेट्रोल और डीजल की लागत में काफी तेज गिरावट देखने को मिली है, फरवरी 2025 में पेट्रोल की लागत जहां 12 महीने के लो स्तर पर तो डीजल का लागत 5 महीने के लो स्तर पर आ गई है।
पेट्रोल और डीजल
SBI सिक्योरिटी की रिपोर्ट के अनुसार फरवरी 2025 में भारत में कुल 31 लाख टन पेट्रोल की खपत हुई है और डीजल की खपत कुल 71 लाख टन हुई है, जनवरी 2025 के डेटा से कंपेयर करें तो पेट्रोल की लागत फरवरी में 5.4 फीसदी गिरी है और डीजल की लागत में 5.1 फीसदी की कमी आई है।
साल 2024 के फरवरी के डेटा की तुलना पेट्रोल की लागत 3.5 फीसदी अधिक रही है और डीजल की लागत में 1.2 फीसदी की गिरावट देखी गई है, इस साल देश में फरवरी महीने में जनवरी के महीने की तुलना में पेट्रोल और डीजल की खपत में गिरावट दर्ज की गई है।
पेट्रोल-डीजल की डिमांड
पेट्रोल की डिमांड में कमी आने की बड़ी वजह भारत में CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बिक्री अधिक होना है, साल 2024 में भारत के अंदर इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में 27 फीसदी की ग्रोथ देखी गई थी, जो पिछले सालों से काफी अधिक है और देश में इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल काफी बढ़ रहा है।
डीजल का इस्तेमाल मुख्य रूप से ट्रांसपोर्टेशन के कार्य में किया जाता है, इस सेक्टर में लो-मोटर व्हीकल (LMV) सेगमेंट अब इलेक्ट्रिक वाहनों पर शिफ्ट हुआ है, जिससे डीजल की खपत में कमी आई है, ट्रक व बस की कैटेगरी में भी अब इलेक्ट्रिक और अल्टरनेटिव फ्यूल जैसे CNG, LPG इत्यादि का इस्तेमाल काफी बढ़ रहा है, भारतीय रेलवे भी डीजल की जगह इलेक्ट्रिक इंजन का उपयोग कर रहा है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री का यह कहना है कि देश को अब भी हर साल अपनी आवश्यकता ज्यादातर पेट्रोलियम इंपोर्ट करना होता है, पेट्रोलियम के लिए आयात पर हमारे देश की निर्भरता बढ़कर 87 फीसदी से ज्यादा हो गई है।