Success Story: सरकारी नौकरी छोड़कर खेती से कमा रहे लाखों, जानिए, इस किसान की रौचक कहानी...
Success Story: सरकारी नौकरी लगने का सपना हर युवा का होता हैं, लेकिन आज हम आपको एक ऐसे ही इंसान के बारें में बताने जा रहें हैं जिसने सरकारी नौकरी का त्याग कर दिया और कैसे खेती से मालामाल हो गए
Top Haryana, New Delhi: आज की इस सक्सेस स्टोरी में आपको एक ऐसे किसान के बारें में बताते हैं जिन्होंने सरकारी नौकरी को छोड़कर खेती करना शुरू किया। ये हैं गया जिले के श्रीनिवास। श्रीनिवास खेती से महीने का डेढ़ लाख से अधिक की कमाई कर रहे हैं।
ये जलकुंभी से वर्मी कंपोस्ट की खाद तैयार करते हैं। अपने गांव के लगभग 3 किलो क्षेत्र के तालाबों में लगी जलकुंभी को भी ये साफ कर चुके हैं। देश के हर युवा की पहली प्राथमिकता सरकारी नौकरी होती है। सरकारी नौकरी के लिए युवा दिन-रात लगातार मेहनत भी करते हैं।
लेकिन आज हम आपको बिहार के एक ऐसे युवा किसान की प्रेरणादायक कहानी बताएंगे, जो कभी इंटरनेशनल लेवल का एथलीट बनना चाहते थे, लेकिन हालातों ने उन्हें एक सफल किसान बना दिया। उन्हें सरकारी नौकरी का ऑफर भी मिला था, लेकिन उन्होंने इसे भी ठुकरा कर खेती को ही अपनाया।
बिहार के गया जिले के बगदाहा गांव के निवासी श्रीनिवास आज आधुनिक खेती करके सालाना करीब 20 लाख रुपये तक की कमाई कर रहे हैं। वे बिहार के पहले ऐसे किसान हैं, जो जलकुंभी से वर्मी कंपोस्ट खाद तैयार करने की तकनीक को विकसित किया है, जो अपने आप में ही एक अनूठा काम हैं।
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एथलीट से किसान बनने तक का सफर
बिहार के प्रगतिशील किसान श्रीनिवास खुद बताते हैं कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि वे खेती बाड़ी का काम करेंगे। बचपन से ही उनका सपना इंटरनेशनल लेवल का बड़ा एथलीट बनने का था। स्कूल और कॉलेज में भी उन्होंने कई नेशनल लेवल की प्रतियोगिताएं जीती थीं।
उनकी इसी प्रतिभा को देखते हुए बिहार सरकार ने उन्हें पुलिस में सिपाही की नौकरी का ऑफर भी दिया। मगर इंटरनेशनल लेवल का एथलीट बनने का जूनून उनके सिर पर था इसी के चलते उन्होंने यह नौकरी भी छोड़ दी थी। वहीं इसके बाद 2010 में पिता की मृत्यु होने के बाद सपनों को विराम लगा दिया और अपने गांव में लौट गए थे।
गांव में आकर अपनी पुश्तैनी 10 एकड़ जमीन पर खेती करने का फैसला कर लिया। शुरुआत के चरण में उन्हें काफी दिक्कतें भी आई थी, लेकिन बाद में कृषि वैज्ञानिकों की सलाह लेने के बाद और अपनी मेहनत के बदौलत उन्होंने खेती में कई क्रांतिकारी तरह के काम किए।